पल्लवी की पहली शिकायत: जब जागरूकता ने लिया एक्शन का रूप
- We, The People Abhiyan

- 4 days ago
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पल्लवी हमेशा अपने आसपास होने वाली गलतियों और अन्याय को ध्यान से देखती रही हैं।
साल 2025 से वह दार्जिलिंग और कालिम्पोंग के युवाओं के साथ Eastern Himalayan Foundation में प्रोग्राम लीड के रूप में काम कर रही हैं। अपने काम के दौरान उन्होंने सिस्टम की कई कमियों को करीब से समझा, खासकर शिक्षा, संसाधनों की पहुंच और अवसरों में।
उन्होंने ऐसे कई बच्चों से मुलाकात की जो काबिल तो थे, लेकिन आर्थिक दिक्कतों, भाषा की बाधा, कम exposure और पहाड़ी इलाकों में खराब डिजिटल सुविधाओं के कारण पीछे रह जाते थे। पल्लवी ने समझा कि सिस्टम ही लोगों की ज़िंदगी को पहले से ही तय कर देता है, उससे पहले कि युवा खुद अपने फैसले ले सकें।
उनके लिए ये समस्याएं सिर्फ शिक्षा तक सीमित नहीं थीं। ये एक बड़े सिस्टम का हिस्सा थीं, जो रोज़मर्रा की जिंदगी में भी दिखती हैं। दार्जिलिंग में कचरा फैलना, गंदा पानी (झोरा), और पीने के पानी की अनियमित सप्लाई जैसी समस्याएं आम हैं।
फरवरी 2025 में EHF से जुड़ने के बाद उन्होंने एक और समस्या नोटिस की VIP रोड, जो दार्जिलिंग की मुख्य सड़कों में से एक है, वहां की स्ट्रीट लाइट्स ठीक से काम नहीं कर रही थीं। कई बार ऑफिस से लौटते वक्त उन्हें अंधेरे में चलना पड़ता था। कई बार वह ठोकर खा जाती थीं, और कई बार डर भी लगता था।
अगस्त में जब उनके माता-पिता उनसे मिलने आए, और वे सब साथ में उसी अंधेरी सड़क पर चल रहे थे, तब उनके पिता ने इस स्थिति को असुरक्षित बताया। उनके पिता की ये चिंता पल्लवी के मन में रह गई।
दिसंबर में, जब We The People Abhiyan की ट्रेनिंग के दौरान उन्हें शिकायत दर्ज करने का मौका मिला, तो उन्होंने तुरंत इस मौके का इस्तेमाल किया। उन्होंने पश्चिम बंगाल के grievance portal पर VIP रोड की स्ट्रीट लाइट्स के बारे में शिकायत दर्ज कर दी। उनकी शिकायत दर्ज हो गई।
इसके बाद पल्लवी छुट्टी पर अपने घर चली गईं। जनवरी में वापस आने के बाद, एक दिन जब वह ऑफिस से लौट रही थीं, तो उन्होंने देखा कि VIP रोड पूरी तरह रोशन था। सभी स्ट्रीट लाइट्स ठीक कर दी गई थीं। और अच्छी बात ये है कि दो महीने बाद भी वो ठीक ही हैं।
पल्लवी कहती हैं,“ये एक छोटा कदम था, लेकिन मेरे लिए बहुत बड़ा अनुभव था। मुझे हैरानी हुई कि ये प्रक्रिया इतनी आसान थी। मुझे समझ आया कि अगर हमें सही तरीका पता हो, तो हमारी आवाज़ सच में मायने रखती है।”
इस अनुभव ने पल्लवी को और ज्यादा सक्रिय बना दिया। उन्होंने महसूस किया कि सिस्टम सिर्फ समस्याएं पैदा नहीं करता, बल्कि उसी सिस्टम के जरिए समाधान भी निकाला जा सकता है।
अपने काम में उन्होंने युवाओं के साथ civic awareness को जोड़ना शुरू किया इसे अलग विषय की तरह नहीं, बल्कि शिक्षा और अवसरों की समझ का हिस्सा बनाया। उन्होंने युवाओं को सिखाना शुरू किया कि कैसे सही जानकारी खुद से ढूंढें, सरकारी पोर्टल्स का इस्तेमाल करें, और अपने अधिकारों व जिम्मेदारियों को समझें।
अब वह युवाओं को सिर्फ योजनाओं का लाभ लेने वाला नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करती हैं।
व्यक्तिगत जीवन में भी उनमें बदलाव आया। उन्होंने अपने घर और दोस्तों के बीच शिक्षा और समानता जैसे मुद्दों पर बातचीत शुरू की। जब उनकी घरेलू काम करने वाली महिला अपनी बेटी की कम उम्र में शादी करना चाहती थी, तो पल्लवी ने उससे बात की कानूनी उम्र, पढ़ाई और भविष्य की सुरक्षा के बारे में समझाया। आखिरकार परिवार मान गया और लड़की को अपनी पढ़ाई पूरी करने का मौका मिला।
पल्लवी के लिए active citizenship अब सिर्फ एक विचार नहीं है।वह कहती हैं,“यह अधिकारों और कर्तव्यों के बीच संतुलन है।”
अब वह खुद को एक ऐसे नागरिक के रूप में देखती हैं जो समाज और सिस्टम के साथ जिम्मेदारी से जुड़कर, सही तरीके से और लगातार बदलाव लाने की कोशिश करती हैं।
The above story has been written and published with the explicit consent of the individual involved. All facts presented are based on WTPA's direct interaction with the individual, ensuring accuracy and integrity in our reporting.

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